₹2,000 से ज्यादा UPI पेमेंट पर 0.4% MDR: सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाने से किया इनकार, जानिए ग्राहकों पर क्या होगा असर🔥
नई दिल्ली, 29 सितंबर 2026: भारत में डिजिटल पेमेंट को लेकर एक बड़ा बदलाव चर्चा में है। ₹2,000 से अधिक के कुछ UPI Merchant Payments पर 0.4% Merchant Discount Rate (MDR) लागू करने के केंद्र के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने 28 सितंबर को तत्काल अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया। अदालत ने मामले में केंद्र सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), NPCI और अन्य संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है।
नई व्यवस्था के तहत यह MDR केवल निर्धारित Person-to-Merchant (P2M) UPI लेनदेन पर लागू होगा। यह व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाली है।
क्या है UPI MDR?
MDR यानी Merchant Discount Rate वह शुल्क है जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने वाले व्यापारी से भुगतान प्रक्रिया में शामिल संस्थाओं को मिलता है। इसमें बैंक, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर और अन्य भुगतान संस्थाएं शामिल हो सकती हैं।
नई व्यवस्था के अनुसार निर्धारित ₹2,000 से अधिक के Merchant UPI Transactions पर 0.4% MDR लगाया जाएगा।
उदाहरण के लिए, यदि कोई पात्र व्यापारी ₹10,000 का UPI भुगतान स्वीकार करता है, तो 0.4% की दर के हिसाब से MDR ₹40 होगा। वास्तविक शुल्क व्यवस्था में लागू सीमाएं और नियम भी महत्वपूर्ण होंगे।
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?
सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने 28 सितंबर को इस मामले की सुनवाई की। अदालत ने MDR व्यवस्था पर तत्काल रोक लगाने से इनकार किया, लेकिन चुनौती देने वाली याचिका पर संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किए।
इसका मतलब यह है कि फिलहाल नई व्यवस्था को लागू होने से रोकने वाला अंतरिम आदेश नहीं है। अंतिम कानूनी स्थिति आगे की सुनवाई और अदालत के आदेशों पर निर्भर करेगी।
क्या आम UPI ग्राहक को पैसे देने होंगे?
सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि MDR व्यापारी-पक्ष से संबंधित शुल्क है और इसे सीधे ग्राहक से वसूलने के लिए UPI ऐप द्वारा अलग से शुल्क लगाने की अनुमति नहीं है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी कहा है कि यह शुल्क ग्राहकों पर नहीं डाला जाना चाहिए।
इसलिए सिर्फ ₹2,000 से अधिक का UPI भुगतान करने पर ग्राहक के बैंक खाते से अलग से 0.4% शुल्क कटना इस व्यवस्था का उद्देश्य नहीं है।
हालांकि, किसी व्यापारी द्वारा इस लागत को अपनी कीमतों या भुगतान के तरीके में शामिल करने की कोशिश की जाती है या नहीं, यह अलग व्यावसायिक प्रश्न है।
₹2,000 से कम के UPI भुगतान का क्या होगा?
नई व्यवस्था मुख्य रूप से निर्धारित ₹2,000 से अधिक के Merchant Payments को लेकर है। रिपोर्टों के अनुसार ₹2,000 तक के ऐसे लेनदेन पर यह MDR लागू नहीं होगा। Person-to-Person यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को किए जाने वाले सामान्य UPI भुगतान भी इस व्यवस्था के दायरे में नहीं रखे गए हैं।
इसलिए रोजमर्रा के छोटे UPI भुगतान करने वाले लोगों पर इस बदलाव का सीधा प्रभाव सीमित रहने की बात कही गई है।
सरकार ने MDR क्यों लागू किया?
सरकार और संबंधित पक्षों की ओर से UPI भुगतान व्यवस्था की लागत, संचालन और लंबे समय तक टिकाऊ डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर तर्क दिए गए हैं। सरकार के अनुसार नई व्यवस्था का उद्देश्य UPI इकोसिस्टम को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाने में मदद करना है।
वहीं, व्यापारी संगठनों ने MDR को लेकर चिंता जताई है। कुछ व्यापारिक संगठनों का कहना है कि अतिरिक्त लागत से छोटे व्यापारियों के मार्जिन पर असर पड़ सकता है।
व्यापारियों पर क्या असर पड़ सकता है?
MDR सीधे व्यापारी-पक्ष की लागत से जुड़ा है। ऐसे में बड़े मूल्य के UPI भुगतान स्वीकार करने वाले कारोबारियों के लिए यह नया खर्च बन सकता है।
खासकर कम मार्जिन वाले कारोबारों में व्यापारी इस अतिरिक्त लागत को लेकर चिंतित हैं। कुछ व्यापारी संगठनों ने सरकार से इस व्यवस्था पर पुनर्विचार की मांग भी की है।
हालांकि, प्रत्येक व्यापारी पर वास्तविक प्रभाव उसके कारोबार, भुगतान की मात्रा और लागू MDR नियमों पर निर्भर करेगा।
क्या UPI बंद या महंगा हो जाएगा?
ऐसा कहना सही नहीं होगा कि UPI पूरी तरह बंद या सामान्य ग्राहकों के लिए सीधे महंगा हो जाएगा।
नई व्यवस्था कुछ निर्धारित Merchant Transactions पर MDR से संबंधित है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि ग्राहकों पर सीधे अतिरिक्त शुल्क डालना इसका उद्देश्य नहीं है।
साथ ही, सुप्रीम कोर्ट में मामले की कानूनी चुनौती अभी जारी है। इसलिए भविष्य में अदालत के आदेशों के आधार पर स्थिति में बदलाव संभव है।
15 अक्टूबर से क्या बदल सकता है?
यदि मौजूदा व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं होता है, तो 15 अक्टूबर 2026 से निर्धारित शर्तों के तहत ₹2,000 से अधिक के पात्र Merchant UPI Transactions पर 0.4% MDR व्यवस्था लागू होगी।
इसका असर मुख्य रूप से भुगतान स्वीकार करने वाले व्यापारियों और UPI पेमेंट इकोसिस्टम पर पड़ेगा, न कि सामान्य ग्राहक द्वारा किए जाने वाले हर UPI भुगतान पर।
ग्राहकों के लिए जरूरी बातें
₹2,000 से अधिक का हर UPI भुगतान अपने आप शुल्क वाला नहीं है; नई व्यवस्था विशेष Merchant Transactions से संबंधित है।
सामान्य Person-to-Person UPI Payments इस MDR के दायरे में नहीं हैं।
₹2,000 तक के निर्धारित Merchant Payments पर नया 0.4% MDR लागू नहीं है।
ग्राहक से सीधे UPI MDR वसूलने का प्रावधान इस व्यवस्था का उद्देश्य नहीं है।
15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाली व्यवस्था पर सुप्रीम कोर्ट में कानूनी चुनौती अभी जारी है।
निष्कर्ष
₹2,000 से अधिक के कुछ UPI Merchant Payments पर 0.4% MDR लागू करने का फैसला डिजिटल पेमेंट क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव है। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इस व्यवस्था पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार किया है और संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है

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